
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस मुख्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी पर SAMPADA 2.0 पोर्टल के नाम पर जमीन दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगा है।
यह आरोप Alexandra Spice And Beverages Pvt. Ltd. के MD सत्येन्द्र विश्वकर्मा ने थाना प्रभारी, खजूरी सड़क में दी गई लिखित शिकायत में लगाए हैं।
SAMPADA 2.0 या सरकारी प्रक्रिया का भ्रम?
शिकायत के अनुसार, आरोपी नरेश रजक, जो पुलिस मुख्यालय भोपाल में कार्यरत हैं, ने अपने पद का प्रभाव दिखाया। SAMPADA 2.0 के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया। केवल फोटो लेकर बायोमेट्रिक प्रक्रिया से बचा। पीड़ित का आरोप है कि यह सब सरकारी प्रक्रिया का भ्रम पैदा करने के लिए किया गया।
जमीन ट्रांसफर के दौरान ₹3,83,700 की राशि गलती से दो बार ट्रांसफर हो गई। पीड़ित का कहना है कि उसी दिन पैसे वापस मांगे गए, लेकिन 20–25 दिन बीत जाने के बाद भी राशि नहीं लौटाई गई।
जिस अकाउंट में पैसा गया, वहां से यह कहकर मना कर दिया गया कि “रजक जी बोलेंगे तभी पैसा वापस होगा।”
कैश लिया, चेक दिया… और वो भी बाउंस
शिकायत में दावा किया गया है कि जमीन के नाम पर ₹7.75 लाख कैश लिया गया। भरोसे के नाम पर ₹7 लाख का चेक दिया गया। लेकिन वह चेक बाउंस हो गया।

जमीन अपने नाम, बात कंपनी की!
सबसे गंभीर आरोप यह है कि ग्राम भौरी, तहसील हुजूर, जिला भोपाल की कृषि भूमि कंपनी के नाम पर एग्रीमेंट का भरोसा दिया गया। लेकिन बाद में जमीन आरोपी ने अपने नाम करा ली। पीड़ित का कहना है कि इस प्रक्रिया में उसका समय, पैसा और व्यापार तीनों बर्बाद हो गए।
संगठित साजिश के संकेत
शिकायत में स्टाम्प विक्रेता से फोन करवाना। अलग-अलग खातों में पैसे मंगवाना। बार-बार टालमटोल जैसे आरोप लगाए गए हैं, जो Organised Fraud की ओर इशारा करते हैं।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी का नहीं, बल्कि सिस्टम, भरोसे और सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग का सवाल है। अब देखना यह है कि कानून अपनी गति से चलेगा या भरोसा फिर घायल होगा?
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